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हमें आपकी एक झलक लग रही थी ||

by Pushkar Ganesh Shah
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शुरुवात धीमी धीमी सी हुई थी ,
पता नहीं पर थोड़ी सी हलचल मची हुई थी ,
शायद धीमी से अपने पन की हवा चल रही थी ,
क्या बताएं
हमें आपकी एक झलक लग रही थी ||
बाते थोड़ी आगे बढ़ रही थी ,
किसी के बग़ैर जिंदगी अधूरी लग रही थी ,
अभी धीरे धीरे वह मेरी वाली लग रही थी ,
क्या बताएं
हमें आपकी एक झलक लग रही थी ||
अब तो बस रोज देखने के लिए रेस लग रही थी ,
उस में हार हो या जीत ,
फिर भी खुशी मिल रही थी ,
गले लगने की ख्वाइश चल रही थी ,
क्या बताएं
हमें आपकी एक झलक लग रही थी ||
अब तो एक दूसरे को , मिलने की घड़ी चल रही थी ,
प्यार से उसको बाहों में , लेने की बारी आ चली थी ,
सुन्दर से लम्हो को जिने की , प्यास बढ़ चली थी ,
क्या बताएं
हमें आपकी एक झलक लग रही थी ||
अब तो दूर रह के भी , पास आने की हलचल बढ़ रही थी ,
इस इश्क़ की चाहत , अब तो बहुत बढ़ रही थी ,
छोटा झूठ भी , साथ का एहसास लगा रही थी ,
क्या बताएं
हमें आपकी एक झलक लग रही थी ||

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