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विधाता और जननी के बीच जंग जारी है

by Madhuri Dubey
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विधाता और जननी के बीच जंग जारी है

विधाता और जननी के बीच जंग जारी है

अहंकार तुम्हें तुमने विश्व को बनाया

इस सुंदर सृष्टि की रचना की

और हम सभी की सांसो की डोर अपने हाथ रख ली

निस्संदेह​ तुम विश्व रचयिता हो

तो क्या अपनी ही बनाई रचना को नष्ट करोगे

मैं भी जननी हूं

तुम्हें ऐसा नहीं करने दूंगी ,गर्व है मुझको

मैंने भी जन्म देकर युगो को आगे बढ़ाया है

वे सभी मेरे अति प्रिय है

मैं उन्हें अब और कष्ट ना देने दूंगी

मैंने भी अपनी संतानों को रक्षा ,सुरक्षा, चिकित्सा ,व्यवस्था ,स्वच्छता में लगाया है

कुछ घर में ही रहकर सुरक्षित हैं और परिवार को सुरक्षित रख रहे हैं

और जप​ कर मंत्र तुम्हारे सिंहासन अवश्य ही हिलाया है

इष्ट​ हो तुम मेरे,​ तुम्हारा स्मरण में हर पल करती हूं

मगर वज्र बनकर मैं तुम्हारे समक्ष खड़ी हूँ

मेरे प्रभु ,अब तुम्हें अपना तांडव​ बंद करना होगा।

दुखी​ हम सभी हैं हमें माफ कर दो।

विधाता और जननी की जंग अभी जारी है

विजयी कौन होगा यह प्रश्न अभी बाकी है

क्या​ ​ विधाता की जिद हारेगी ?या

क्या साहसी जननी​ ​ जीत​ जाएंगी?

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1 comment

Monica August 16, 2020 - 3:00 pm

Didi bahut badhia kavita likhi aapne! Aisey hi likhte rahiye! Aur hum sab ka marg darshan kjiye!

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