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ये दावों और विपरीत दावों ( Claims & Counter-claims) का दौर है ज़नाब!

by Dhananjoy Masoorkar
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ये दावों और विपरीत दावों ( Claims & Counter-claims) का दौर है ज़नाब! विडम्बना ये है कि ये दोनों इतनी खूबी से किये जाते हैं कि ये पता लगाना लगभग असम्भव हो जाता है कि कौन सा सच्चा है और कौन सा झूठा। और फिर जगप्रसिद्ध Murphy’s Law लागू हो जाता जिसके अनुसार यदि कुछ गलत हो सकता है, तो वो होकर रहता है!!
किसी भी बात या दावे या आरोप की मोटी-मोटी सच्चाई का पता लगाने का एक बड़ा आसान सा तरीका है मैंने अपने अनुभव से खोज निकाला है जिसे आप चाहें तो आजमा सकते हैं। ये इसप्रकार है।
यदि संबंधित बात/दावे पर विचलित होने वाले या आपत्ति उठाने वाले या नकारात्मक प्रतिक्रिया देने वाले लोग प्रमुखतः ‘हितबद्ध (interested) लोग’ हैं जिनका इससे किसी न किसी तरह का कोई संबंध है या रहा है या भविष्य में रह सकता है, तो बात/दावे में सच्चाई होने की बड़ी संभावना है। और यदि ये लोग सामान्य लोग हैं जिनका उस बात से कोई सीधा या व्यक्तिगत ताल्लुक न है न कभी रहा है, तो शायद बात में ही खोट है। आप थोड़ासा सोचेंगे तो इस तरह के आपके इर्द-गिर्द के ही अनेक उदाहरण तो वैसे ही आपके दिमाग में आ जाएंगे।
सच्चाई का पता लगाना उतना मुश्किल काम नही है जितना हम सोचते हैं। केवल पता लगाने की मज़बूत चाहत होनी चाहिए। क्योंकि आज के समय में काम तो झूठ से भी चल ही जाता है। कलयुग जो है।
सुप्रभात एवं धनतेरस की शुभकामनाऐं!

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