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“मुस्कुराने की आदत है”

by Madhuri Dubey
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हमें तो दर्द भुलाकर मुस्कुराने की आदत है,

हुआ क्या जो तुमने हमें ढलता सूरज कहा,

हमें तो अंधेरी रात में जगमगने की आदत है,

हमें तो दर्द भला कर मुस्कुराने की आदत है।

हुआ क्या जो तुमने हमें भला बुरा कहा,

हम तो शिव भक्त हैं,  विष पीकर अमृत बरसाने की आदत है,

हमें तो दर्द भुलाकर मुस्कुराने की आदत है।

हुआ क्या जो ठोकर लगती रही चलतेचलते.

हमें तो ठोकर खाकर भी आगे बढ़ने की आदत है,

हमें तो दर्द बुलाकर मुस्कुराने की आदत है।

जागती आंखों से सपने देखती रही बहुत,

हमें तो सपनों को सच करने की आदत है,

हमें तो दर्द भुला कर मुस्कुराने की आदत है।

साथ मिलजुल के रहना यह सबक सीखा और सिखाया हमने,

मिले अगर कभी तो तुमसे यह पूछेंगे,

जानते सब हो अनजान बनने की तुमको आदत है,

हमें तो दर्द भुला कर मुस्कुराने की आदत है।

सुनके बंसी की धुन दौड़ कर आए हम,

तुम्हें तो देख कर भी छुप जाने की आदत है,

हमें तो दर्द भुलाकर मुस्कुराने की आदत है।

मुझे सिर्फ याद हो तुम, तुम ही मुझको भूले हो,

कान्हा तुम्हें कैसेकैसे खेल खेलने की आदत है,

हमें तो दर्द बुलाकर मुस्कुराने की आदत है।

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