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पारसमणि सा

by Madhuri Dubey
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स्नेह ने मां के तुम्हें आगे बढ़ाया,

अनुशासन ने पिता के सुदृढ़ बनाया,

स्नेह ममता की हो तुम पर सदैव वर्षा,

तुम रहो विजयी हमेशा।

अहंकार तुम्हें कभी छूने पाए,

बनना ऐसा वह जो गिरते को उठाऐ

जो तुम्हें देखें कहे

पुत्र हो तो सिर्फ तुमसा

तुम रहो विजयी हमेशा

यश कीर्ति मिले तुम्हें यूं ही निरंतर

तुम बढ़ो आगे पहुंचो  शिखर पर,

आज से स्पर्श हो तुम्हारा पारस मणि,

तुम रहो विजयी हमेशा

तुम रहो विजयी हमेशा।

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