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झुकी पलकें,मीठी मुस्कान का – प्रिय सुशांत

by Suman Rajput
9 comments 2 minutes read
Sushant singh rajput
    झुकी पलकें,मीठी मुस्कान का

            हर कोई कायल हो गया
             तुम्हारे जाने से देखो
            ये जमाना घायल हो गया
          माना मतलबी थी, वो दुनिया
               तुम उसमें कैसे रहते
                एक बार अपना दर्द
               किसी फेन से तो कहते
          वादा था तुम्हारे साथ हो रहे,
           जुल्म के आड़े हम सब आ जाते
          कसम से तुम्हे, हर दर्द से खींच लाते
               पर तुमने तो जैसे सबसे
                दूर जाने ने की ठानी थी
            तारों से गुफतगु क्या कम थी
           जो उनकी सुध भी लेने जानी थी
          अवसाद के हाथों तुम मजबूर हो गए
       तुम्हारे वो पचास सपने, भी चूर चूर हो गए
     देखो भीगी आँखो से, सब तुम्हे याद करते हैं
       तुम्हारे वापस आने की फरियाद करते हैं
                    लौट आओ सुशांत,
               रोती आँखो को चुप करा दो
        हँस उठे ये होंठ,तुम एक बार फिर मुस्कुरा दो

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9 comments

Naveen shrivastava June 19, 2020 - 3:18 pm

Very nice poem

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lalit singh June 19, 2020 - 3:26 pm

Nice line

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Madhu June 19, 2020 - 3:26 pm

Beautifully written….

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Suman Rajput June 20, 2020 - 3:45 pm

Thank you ?everyone for ur valuable likes comments…

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Pooja Mishra June 19, 2020 - 3:42 pm

Wow Di ??

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Ramavtar Kushwaha June 19, 2020 - 3:52 pm

वाह सुमन… बहुत सुंदर रचना..????
सुशांत की ख़ूबी… उसका दर्द… उसकी व्यथा…
सब आपने बख़ूबी बयान किया…
ज़िंदगी से हार गया वो.. जान है तो जहान है।
आगे भी ऐसी सुंदर रचना करती रहें मेरी अशेष शुभकामनाएँ।

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Prachetan Potadar June 19, 2020 - 4:32 pm

You’re doing great job suman,

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Khushboo June 19, 2020 - 5:35 pm

Heart touching lines suman di…. ??

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Smita June 20, 2020 - 4:51 am

Very heart touching post?

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