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क्षमा

by Madhuri Dubey
1 comment < 1 minute read
क्षमा

क्षमा दान सबसे बड़ा दान है,
एक तुम यह दान दे पाओ तो जानू।

किया जो मैंने उसकी में दोषी,
किया जो ना मैंने उसकी में दोषी,
मैं ही गलत चलो मैंने यह माना,
इस पर भी गुस्सा न लाओ तो जानू।

जब जिसको चाहा अपना तुमने माना,
जब जिसको चाहा अपना ना माना,
अपनों को तो अपना कहते सभी हैं,
दूसरों को अपना बनाओ तो जानू।

क्षमा करके क्या कोई छोटा हुआ है,
समान ना कर क्या कोई ऊंचा उठा है,
दोगे जो तुम पाओगे वही मेरी बात,
तुमको मानू क्षमादान….
क्षमा दान सबसे बड़ा दान है,
एक तुम ये दान दे पाओ तो जानू।

कभी तुम यह कह कर कि यह है तुम्हारा,
कभी तुम यह कहते कि वह है तुम्हारा,
मेरे तुम्हारे का चक्कर बुरा है,
इस चक्कर से बाहर जो आओ तो जानू।
क्षमा दान सबसे बड़ा दान है,
एक तुम ये दान दे पाओ तो जानू।

जितना सच यह है कि तुमको जीवन मिला है,
जीवन मिला है तो मरना है निश्चित,
उम्र बाकी है कितनी यह कोई न जाने,
वक्त जितना है हंस कर बिताओ तो जानू,

क्षमा दान सबसे बड़ा दान है,
एक तुम ये दान दे पाओ तो जानू।

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1 comment

Bhavana Walimbe August 11, 2020 - 1:45 pm

Excellent

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